वक्त का आईना: संघर्ष की 10 चुनिंदा शायरियां
जीवन की राह हमेशा फूलों से नहीं सजी होती। कभी-कभी इंसान खुशियाँ ढूंढने निकलता है और मुसीबतों से उसका सामना हो जाता है। आज की यह पोस्ट मेरे उन सभी साथियों के लिए है जो अपनी मुसीबतों से लड़ रहे हैं।
खुशियां ढूंढने चले थे: जीवन का कड़वा सच
यहाँ कुछ ऐसी शायरियां हैं जो आपके दिल के करीब होंगी
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| संघर्ष करती हुई लड़की |
1. वक्त की मार
खुशियां ढूंढने चले थे, मुसीबतों से मुलाकात हो गई,
मेरा ही घर छूटा, सारे शहर में बरसात हो गई।
सपनों की पोटली लेकर हम निकले थे घर से,
पर बीच राह में ही अंधरे से बात हो गई।
2. बढ़ती मुसीबतें
कल तक जो छोटी थी, वो सामने खड़ी है अब मेरे,
वक्त के साथ मैं ही बड़ा नहीं हुआ, मेरी मुसीबतें भी बड़ी हो गई।
बचपन में खिलौने टूटने का गम बड़ा लगता था,
अब दिल टूटने पर भी मुस्कुराहटें बड़ी हो गई।
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चेहरे की हंसी के पीछे का समंदर कोई न पढ़ पाया,
उम्र के साथ खामोशियाँ भी हमारी अपनी हो गई।
सोचा था लौट आएंगे जीत का परचम लहरा कर,
पर हार से दोस्ती भी अब पुरानी हो गई।
4. उम्मीद का दीया
रास्ते मुश्किल थे मगर हमने कदम बढ़ाना न छोड़ा,
तूफानों की ज़िद थी, पर हमने घर बनाना न छोड़ा।
लोग कहते रहे कि वक्त हाथ से फिसल गया है,
हमने हार कर भी उम्मीद का दामन थामना न छोड़ा।
5. अकेलापन
भीड़ में तो बहुत थे चेहरे जाने-पहचाने से यहाँ,
पर वक्त पड़ने पर सब की राहें जुदा हो गई।
हम तो अपना साया समझ कर साथ चलते रहे,
धूप ढली तो परछाईं भी हमसे खफा हो गई।
6. संघर्ष की कहानी
हथेली की लकीरों ने बहुत डराया था हमें भी,
पर मेहनत की स्याही से किस्मत नई हो गई।
जो कहते थे कि तुम कुछ न कर पाओगे बबलेश,
आज उनके तानों की गूँज भी अनसुनी हो गई।
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| संघर्ष करता हुआ युवा लड़का |
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7. सपनों का बोझ
कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ कुछ ऐसा बढ़ा,
कि अपनी ख्वाहिशें ही जैसे पराई हो गई।
ख्वाबों को हकीकत बनाने की जद्दोजहद में,
सुकून की नींद भी अब जैसे ख़्वाब हो गई।
8. वक्त का तकाज़ा
आईने में खुद को देखा तो पहचान न पाया,
वक्त की लकीरें चेहरे पर कितनी गहरी हो गई।
कल तक जो ज़िद थी दुनिया जीतने की मन में,
आज अपनों का साथ पाने की आरज़ू बड़ी हो गई।
9. सादगी का सफर
महल की चाहत में हम गाँव की झोपड़ी को भूल बैठे,
पर असली सुकून तो मिट्टी की खुशबू में ही हो गई।
दौड़ते रहे ताउम्र जिस शोहरत के पीछे हम,
अंत में दो पल की शांति ही सबसे बड़ी हो गई।
10. जीत का जज्बा
गिर कर संभलना ही तो असली जिंदगी है "बबलेश",
ठोकरों से हमारी पहचान और भी खरी हो गई।
किस्मत ने चाहे कितने भी कांटे बिछाए हों राहों में,
हमारी हिम्मत उन कांटों से भी ज्यादा बड़ी हो गई।
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निष्कर्ष (Conclusion)
जीवन में मुसीबतें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाएँ, इंसान को कभी हार नहीं माननी चाहिए।
यह शायरियां केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि हर उस व्यक्ति की आवाज हैं जो हर दिन एक नया संघर्ष करता है। उम्मीद है आपको मेरी ये शायरियाँ पसंद जरूर आई होगी।
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